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  • Rimjhim Agarwal "लाला, सच सच बता तूने मटकी फोड़ी है न?तूने ही माखन खाया है ना?" नहीं मैया,मैंने मटकी नहीं फोड़ी।मटकी तो इतनी ऊंची रखी है और मैं इतना छोटा ।मेरे हाथ ही नहीं पहुंचते मटकी तक ।मैं कैसे मटकी फोड़ सकता हूँ।" "तो क्या बलराम और ग्वाले झूठ बोल रहे हैं। ये तेरे मुख पर माखन कैसे लगा है।मटके में से निकल कर अपनेआप लग गया तेरे मुख पर?बोल चुप क्यों है अब।" "वो मैया,मैया वो, हां ये तो दाऊ ने मेरे मुख पर लगा दिया ग्वालों के साथ मिलकर।मटकी दाऊ से फूटी मैया,फिर तेरे आने की आहट सुनकर माखन मेरे मुख पर लगा दिया और सब भाग गए।ताकि मैया मुझ पर शक करे।सच्ची मैया मैंने माखन नहीं खाया।" मैया को असमंजस में देखकर कान्हा ने अपना अगला दांव खेला और रोने लगे।कान्हा को रोता देखकर मैया का हृदय पिघल गया और उन्होंने कान्हा से पूछा, "क्यों रो रहा है तू लाला।" "मैया तुझे लगता है मैं झूठ बोल रहा हूँ ।मेरी बात नहीं मानोगी न मैया।हां वैसे भी मैं तो तेरा लाला नहीं हूं न।दाऊ ने सच कहा था मुझे तो बाबा यमुनाजी के किनारे से उठा कर लाए थे।इसलिए तेरे दिल में भेद उपजा है मैया।ठीक है मैया अब मैं यहां नहीं रहूंगा।चला जाऊंगा यहाँ से।" कान्हा के मुख से ये सुनकर मैया का कलेजा फटने लगा।कोई माँ ये कैसे सहन करेगी जब उसका बेटा कहे मैं तेरा बेटा नहीं हूं।कान्हा को गले लगाते हुए मैया बोली, "न लाला तू मेरा ही लाल है।आने दे आज बलराम को अच्छे से खबर लूंगी उसकी।मेरे लाला पर झूठा इल्जाम लगाता है।" मैया के गले लगे हुए मोहन मंद मंद मुस्कुरा रहे रहे।जिनकी लीला स्वयम शिव शंकर नहीं समझ पाए उसे भोली मैया कैसे समझेगी।
    August 26, 2019